छत्तीसगढ़ : UAPA के प्रकरण में 3 आरोपियों को 10-10 वर्ष सश्रम कारावास एवं ₹3,500 - ₹ 3,500 अर्थदंड की सजा।
माननीय विशेष न्यायाधीश (NIA), भानुप्रतापपुर दीपक के. गुप्ता की अदालत का फैसला।
अपर लोक अभियोजक टी.एस. यादव द्वारा प्रकरण में प्रभावी पैरवी।
छत्तीसगढ़ ( कांकेर ) ओम प्रकाश सिंह। दिनांक 20.05.2023 को प्रार्थी द्वारा थाना कोयलीबेड़ा में रिपोर्ट दर्ज कराई गई कि दिनांक 18.05.2023 को प्रतिबंधित भाकपा माओवादी संगठन की गतिविधियों की सूचना पर सुरक्षा बलों द्वारा COB चिलपरस एवं ढूंट्टा से संयुक्त सर्च अभियान प्रारंभ किया गया था। अभियान के दौरान कागबरस, नयापारा, चिलपरस क्षेत्र में सर्च करते हुए केसोकोड़ी की ओर बढ़ने पर पहाड़ी जंगल के पास कुछ संदिग्ध व्यक्ति भागने लगे। सुरक्षा बलों द्वारा घेराबंदी कर उन्हें पकड़ा गया।
पूछताछ में आरोपियों ने अपनी पहचान पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम, रमेश पुनेम उर्फ बुधरू एवं पुनऊ राम मंडावी के रूप में बताई। आरोपियों के प्रतिबंधित माओवादी संगठन से जुड़े होने तथा संगठन में विभिन्न पदों पर कार्य करने की जानकारी सामने आई।
तलाशी के दौरान आरोपियों के कब्जे से वॉकी-टॉकी सेट, माओवादी संगठन की चिट्ठियां, नक्सली साहित्य, नगदी रकम, गुलेल, टॉर्च एवं चाकू सहित अन्य सामग्री बरामद की गई। आरोपियों को पकड़ने के दौरान पुलिस पार्टी पर हमला किए जाने से एक जवान के दाहिने हाथ में चोट भी आई।
उक्त घटना पर थाना कोयलीबेड़ा में अपराध क्रमांक 08/2023 के तहत धारा 147, 148, 149, 307 भादवि, धारा 04, 05 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम एवं धारा 38(2), 39(2) विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया।
दोषसिद्ध आरोपियों का विवरण :-
1. पीलूराम आंचला उर्फ सालिक राम, पिता स्व. नोहरू राम, उम्र 35 वर्ष, निवासी इमलीपारा कागबरस, थाना कोयलीबेड़ा, जिला उत्तर बस्तर कांकेर।
2. रमेश पुनेम उर्फ बुधरू, पिता लक्कू, उम्र 25 वर्ष, निवासी वड्डे पारा, पूसनार, थाना गंगालूर, जिला बीजापुर।
3. पुनऊ राम मंडावी, पिता स्व. लच्छन राम, उम्र 22 वर्ष, निवासी बिचपारा गोमे, थाना नारायणपुर, जिला नारायणपुर।
🚨पुलिस टीम :-
1. अमर सिदार, अनुविभागीय अधिकारी पुलिस, अंतागढ़।
2. निरीक्षक मालिक राम केवट।
3. उप निरीक्षक मोहित पारिक।
4. प्रधान आरक्षक अमित ढिढी।
5. प्रधान आरक्षक जगमोहन सलाम।
कांकेर पुलिस द्वारा गंभीर एवं संवेदनशील प्रकरणों में प्रभावी विवेचना, साक्ष्य संकलन तथा अभियोजन के साथ समन्वय स्थापित कर न्यायालयीन कार्यवाही में प्रभावी परिणाम सुनिश्चित करने हेतु निरंतर कार्य किया जा रहा है।








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