छत्तीसगढ़ : बाफना लाइफस्टाइल में 21 साल की दीपा की संदिग्ध मौत ने खड़े किए कई-सवाल..., आखिर दुकान के भीतर उस रात क्या हुआ था❓

छत्तीसगढ़ : बाफना लाइफस्टाइल में 21 साल की दीपा की संदिग्ध मौत ने खड़े किए कई-सवाल..., आखिर दुकान के भीतर उस रात क्या हुआ था❓ 

 


परिजनों और बड़ी संख्या में वार्डवासियों ने घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।



सीसीटीवी फुटेज और चोट के निशानों को लेकर उठाए सवाल❓

परिजनों ने जताई हत्या की आशंका...!

 


1 सप्ताह पहले ही शुरू की थी नौकरी, दुकान के जनरेटर रूम में मिला-शव

दुकान में गई थी रोजगार की तलाश में, घर लौटी तो अर्थी पर आने की आशंका...!

दंतेश्वरी वार्ड की बेटी की मौत से शहर स्तब्ध...!

छत्तीसगढ़ ( बस्तर-जगदलपुर ) ओम प्रकाश सिंह । बेटियां अपने सपनों को पंख देने के लिए घर से निकलती हैं, अपने परिवार का सहारा बनने की उम्मीद लेकर नौकरी शुरू करती हैं, उसी उम्र में 21 वर्षीय दीपा सागर की जिंदगी रहस्यमय परिस्थितियों में खत्म हो गई। दीपा घर से रोजगार की तलाश में निकली थी, लेकिन अब उसके परिजन उसकी मौत के पीछे छिपे सच की तलाश में दर-दर सवाल उठा रहे हैं। 



पूर्व विधायक संतोष बाफना के प्रतिष्ठान पर मृतक के परिजनों और भारी संख्या में वार्डवासियों ने जोरदार प्रदर्शन किया।



मंगलवार को मृतिका के परिजन और क्षेत्रीय नागरिक बड़ी संख्या में एकत्र होकर बाफना लाइफस्टाइल शॉप पहुंचे और निष्पक्ष न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। 



शहर के बाफना लाइफस्टाइल कपड़े की दुकान के जनरेटर रूम में उसका शव मिलने की घटना ने न केवल शहर को झकझोर दिया है, बल्कि दुकान की सुरक्षा व्यवस्था और जांच की पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं❓



जगदलपुर के पूर्व विधायक संतोष बाफना के स्वामित्व वाले इस प्रतिष्ठान का मृतिका दीपा सागर के परिजनों और बड़ी संख्या में वार्डवासियों ने घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया।




दंतेश्वरी वार्ड निवासी दीपा ने महज एक सप्ताह पहले ही दुकान में ग्राउंड स्टाफ के रूप में काम शुरू किया था। परिवार के लिए यह नई शुरुआत और बेहतर भविष्य की उम्मीद थी, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि नौकरी के शुरुआती दिनों में ही ऐसी दर्दनाक खबर सामने आएगी।



शाम को गायब हुई, अगली सुबह मिली-लाश

मिली जानकारी के अनुसार, रविवार 1 नवंबर 2026 की शाम लगभग 6:00 बजे दीपा दुकान में दिखाई नहीं दी। सहकर्मियों ने समझा कि वह घर जा चुकी है। इसके बाद दुकान बंद कर दी गई। लेकिन सोमवार सुबह जब कर्मचारी दुकान के ऊपर स्थित जनरेटर रूम पहुंचे, तो वहां दीपा का शव जमीन पर पड़ा मिला। बताया जा रहा है कि फंदे के लिए इस्तेमाल किया गया दुपट्टा भी टूटा हुआ था।



आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक युवती दुकान के भीतर संदिग्ध परिस्थितियों में मृत मिली❓ 

क्या दुकान बंद होने से पहले उसकी तलाश की गई थी❓

क्या किसी ने यह जानने की कोशिश की कि वह घर पहुंची भी थी या नहीं❓

परिजनों का दर्द और व्यवस्था के सामने सवाल❓



घटना की जानकारी मिलते ही परिजन मौके पर पहुंचे। बेटी का शव देखकर परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। लेकिन मातम के बीच उनके मन में उठे सवालों ने आक्रोश का रूप ले लिया। परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए दुकान प्रबंधन और संबंधित व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए।



परिजनों का कहना है कि उन्हें दुकान के सीसीटीवी फुटेज नहीं दिखाए गए। इतना ही नहीं, उनका आरोप है कि उन्हें मृतका का चेहरा तक देखने नहीं दिया गया और डॉक्टरों की टीम शव को पीछे के दरवाजे से डिमरापाल अस्पताल ले गई। मृतका के चचेरे भाई ने शव पर चोट के कई निशान होने की बात कही है। यदि ये आरोप सही हैं, तो यह मामला और भी गंभीर हो जाता है।

आखिर परिजनों को उनकी बेटी का चेहरा देखने से क्यों रोका गया❓

सीसीटीवी फुटेज दिखाने में क्या परेशानी थी❓

शव को ले जाने की प्रक्रिया में परिजनों को भरोसे में क्यों नहीं लिया गया❓

टूटे दुपट्टे से लेकर चोट के निशानों तक, जवाब कौन देगा❓

घटनास्थल पर मिले टूटे दुपट्टे, शव पर बताए जा रहे चोट के निशान और घटना से जुड़े घटनाक्रम को लेकर कई सवाल हैं❓

क्या यह आत्महत्या का मामला है, या इसके पीछे कोई दूसरी वजह छिपी है❓

क्या घटनास्थल को सुरक्षित रखकर वैज्ञानिक तरीके से जांच की गई❓

दुकान के सीसीटीवी कैमरों में उस शाम की गतिविधियां दर्ज हैं या नहीं❓

यदि हैं, तो उन फुटेज को तत्काल सुरक्षित कर जांच में शामिल किया जाना चाहिए।
सिर्फ पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं, हर सवाल का जवाब जरूरी दीपा अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसकी मौत से जुड़े सवाल अभी जिंदा हैं। एक परिवार अपनी बेटी को खो चुका है। ऐसे में उसे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच चाहिए। पुलिस को दुकान के सभी सीसीटीवी फुटेज, कर्मचारियों के बयान, घटनास्थल की परिस्थितियों और फोरेंसिक साक्ष्यों की बारीकी से जांच करनी चाहिए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के साथ हर पहलू की वैज्ञानिक जांच जरूरी है।

यह मामला किसी एक परिवार के दुख तक सीमित नहीं है। यह उन तमाम सवालों से जुड़ा है, जो कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा और संस्थानों की जवाबदेही को लेकर खड़े होते हैं।

दीपा की मौत को महज एक आंकड़ा बनाकर फाइलों में बंद नहीं किया जाना चाहिए। सवाल यह नहीं कि उसकी मौत को क्या नाम दिया जाएगा,

सवाल यह है कि उस रात आखिर हुआ क्या था❓

एक बेटी की जिंदगी किन परिस्थितियों में खतम हुई❓

उसके परिवार को सच जानने का अधिकार है और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि उस अधिकार को पूरा करे।
दीपा को न्याय चाहिए, उसके परिवार को जवाब चाहिए और शहर को सच जानने का इंतजार है।

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