छत्तीसगढ़ : कुम्हड़ाकोट से ससम्मान लौटाया गया 'चुराया' हुआ 8 चक्कों वाला विशाल विजय रथ...!
नवाखानी संग संपन्न हुई 'बाहर रैनी' की रस्म
छत्तीसगढ़ ( जगदलपुर ) बस्तर दर्पण । विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक बस्तर दशहरे में सामाजिक समरसता, समृद्ध लोक-आस्था और सदियों पुरानी परंपरा का एक बेहद जीवंत दृश्य देखने को मिला, जब 'भीतर रैनी' के बाद निभाई जाने वाली बहुप्रतीक्षित 'बाहर रैनी' की रस्म पूरी गरिमा के साथ संपन्न हुई।
परंपरा के मुताबिक, भीतर रैनी की रस्म पूरी होते ही माड़िया जनजाति के लोगों ने आठ चक्कों वाले विशालकाय रथ को बुधवार को चुपचाप खींचकर शहर से दूर लालबाग स्थित कुम्हड़ाकोट के घने जंगलों में छिपा दिया था। यह प्रतीकात्मक "रथ चोरी" राजा और प्रजा के बीच संवाद, अपनत्व और मान-मनौव्वल की उस अद्भुत बस्तर संस्कृति का अभिन्न अंग है, जो सदियों से चली आ रही है।
मान-मनौव्वल और नवाखानी की इस रस्म के संपन्न होते ही माड़िया समुदाय के लोग और राजपरिवार के सदस्य एकजुट हो गए और पूरे शाही ठाठ-बाट, पारंपरिक गाजे-बाजे और जयकारों के साथ उस विशालकाय रथ को खींचते हुए वापस राजमहल के सिंह द्वार ले आए, जिसके साथ ही बस्तर दशहरे की बहुप्रतीक्षित रथ परिक्रमा रस्म का विधिवत समापन हो गया।








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