छत्तीसगढ़ : हर्बल गुलाल प्रशिक्षण से महिला स्वावलंबन को मिला नया आयाम।

छत्तीसगढ़ : हर्बल गुलाल प्रशिक्षण से महिला स्वावलंबन को मिला नया आयाम।



छत्तीसगढ़ ( जगदलपुर ) बस्तर दर्पण । क्रांतिकारी देबरिधुर उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, जगदलपुर एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के द्वारा “महिला शक्ति जागेगा, बस्तर का कायाकल्प होगा” के बोध वाक्य को साकार करने की दिशा में 20 से 21 फरवरी तक हर्बल गुलाल निर्माण प्रशिक्षण का सफल आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण में बस्तर जिले के सातों विकासखण्डों से आई स्व-सहायता समूहों की 50 महिलाओं तथा फूल विज्ञान के 50 छात्र-छात्राओं ने सहभागिता सुनिश्चित की।



इस प्रशिक्षण में माँ दन्तेश्वरी, गौरी शंकर, रोशनी, दुर्गा माँ, मुस्कान एवं विहान समूह की महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि व वक्ता गोपाल सिंह नाग, प्रांत कार्यकारिणी कृषक सदस्य एवं स्कूल समन्वयक की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। इस अवसर पर अधिष्ठाता डॉ. जी.पी. नाग, डॉ. ईशु साहू तथा राजकुमार देवांगन, कुमारी सुमन एवं अन्य सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे।



मुख्य वक्ता गोपाल सिंह नाग ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज बस्तर की महिलाएँ पंच से लेकर राष्ट्रपति तक, शिक्षक से लेकर कलेक्टर तक तथा छोटे-छोटे व्यवसायों के माध्यम से आर्थिक समृद्धि की दिशा में पुरुषों के साथ कदमताल करते हुए आगे बढ़ रही हैं, जो बस्तर के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने “पंच परिवर्तन” के अंतर्गत परिवार प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्व-बोध एवं नागरिक कर्तव्यों के माध्यम से सामाजिक जागरूकता लाने पर बल दिया।
अधिष्ठाता डॉ. जी.पी. नाग ये हुआ है सभी प्रशिक्षणार्थी को शुभकामनाएं और बधाई देते हुए कहा कि, बस्तर प्राकृतिक संपदा से समृद्ध क्षेत्र है। यहाँ के जंगलों में औषधीय पौधे, रंगीन फूल तथा विभिन्न प्रकार की वन उपज प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं। हमारे आसपास पलाश, गेंदा, हल्दी, चुकंदर, नीम जैसे प्राकृतिक स्रोत मौजूद हैं, जिनसे सुंदर एवं सुरक्षित हर्बल रंग तैयार किए जा सकते हैं। यदि इन संसाधनों का सही उपयोग किया जाए तो यह महिलाओं के लिए आय का एक सशक्त माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण मातृशक्ति को नया कौशल प्रदान कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में प्रेरित करेगा।

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को हर्बल गुलाल निर्माण की वैज्ञानिक विधि, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग तथा विपणन की जानकारी दी गई, जिससे वे स्वरोजगार स्थापित कर आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें। कार्यक्रम के अंत में सभी प्रतिभागियों ने इस प्रशिक्षण को अपने जीवन में उपयोगी बताते हुए महाविद्यालय एवं बिहान के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए डॉ. राम कुमार देवांगन के साथ सभी अधिकारी एवं कर्मचारी दो दिनों तक पूरे कार्यक्रम की सफलता के लिए जुटे रहे।

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