छत्तीसगढ़ : नक्सली हमला एवं पुलिस जवानों की हत्या के प्रयास मामले में 5 आरोपी दोषसिद्ध।

छत्तीसगढ़ : नक्सली हमला एवं पुलिस जवानों की हत्या के प्रयास मामले में 5 आरोपी दोषसिद्ध।



2015 के भैसगांव-नागरमारी पहाड़ी मुठभेड़ प्रकरण में माओवादी आरोपियों को न्यायालय से सजा।

25 लाख का ईनामी नक्सली प्रभाकर राव संगठन में एसजेडसीएम, आरसीएम उत्तर सब जोनल ब्युरो मापोस टीम प्रभारी के पद पर तथा 8 लाख की ईनामी नक्सली उसकी पत्नी राजे कांगे संगठन में डीव्हीसीएम रावघाट एरिया कमेटी प्रभारी नक्सल संगठन में लगभग 40 वर्षों से सक्रिय रहकर कर रहे थे कार्य।

प्रभाकर एवं राजे कांगे के विरूद्ध हत्या, लूट, अपहरण सहित विरूद्ध विभिन्न थानों में कुल 64 एवं 36 प्रकरण दर्ज।

ईनामी नक्सली प्रभाकर रावराजे कांगे कई गंभीर नक्सली वारदात में रहे शामिल थाना प्रभारी एवं गोपनीय सैनिक की हत्या से लेकर जनअदालत में हत्या तक में संलिप्तता ।

मुख्य वारदातों में बेठिया चौक गोपनीय सैनिक दुर्ग आंचला की हत्या, ग्राम अवलबरस के जंगल पुलिसकर्मी की हत्या, ग्राम तोड़हुर में घर में प्रवेश कर ग्रामीण की हत्या, हिदुर जंगल पहाड़ी पुलिस नक्सली मुड़भेड़, जिला नारायणपुर के ग्राम गोमे में जन अदालत लगाकर हत्या करना इत्यादि घटना शामिल।

छत्तीसगढ़ ( कांकेर ) ओम प्रकाश सिंह । दिनांक 07.09.2015 को थाना कोरर, जिला कांकेर के तत्कालीन उप निरीक्षक मोहन निषाद के नेतृत्व में कुल 49 पुलिस जवान/अधिकारी-कर्मचारी नक्सली सर्चिंग करते हुए ग्राम भैसगांव-नागरमारी पहाड़ी क्षेत्र में पहुंचे थे। सर्चिंग के दौरान सीपीआई (माओवादी) नक्सली प्रभाकर, राजे कांगे एवं अन्य सात - आंठ वर्दीधारी माओवादी नक्सलियों द्वारा पुलिस जवानों से हथियार छीनने एवं उनकी हत्या करने के नियत से पुलिस पार्टी पर फायरिंग की गई। पुलिस बल द्वारा तत्काल आत्मरक्षार्थ जवाबी फायरिंग की गई। मुठभेड़ के पश्चात माओवादी नक्सली मौके से भाग गए।
अपराध पंजीबद्ध - घटना के बाद सहायक उप निरीक्षक मोहन निषाद द्वारा सर्चिंग से वापस लौटने पर दिनांक 07.09.2015 की रात्रि 22:15 बजे थाना कोरर में प्रभाकर, राजे कांगे, रेनू दुग्गा, सोनू, मनोज, पीलाराम, श्रवण कोर्राम एवं अन्य 7-8 वर्दीधारी माओवादी नक्सलियों के विरुद्ध अपराध क्रमांक 108/2015 पंजीबद्ध करवाया गया। प्रकरण में धारा 147, 148, 149, 307 भादवि तथा 25, 27 आम्स एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना प्रारंभ की गई।

आरोपियों की गिरफ्तारी एवं विवेचना - विवेचना के दौरान प्रकरण के प्रथम सूचना पत्र में नामजद आरोपीगण प्रभाकर, राजे कांगे तथा उन्हें सहयोग एवं संरक्षण देने वाले आरोपीगण श्यामनाथ उसेंडी, चिंतूराम ताम्रकार एवं रमेश कुमार कुमेटी को को गिरफ्तार कर विवेचना की गई। विवेचना पूर्ण होने के उपरांत दिनांक 20.06.2025 को अभियुक्तगण प्रभाकर, राजे कांगे, श्यामनाथ उसेंडी, चिंतूराम ताम्रकार एवं रमेश कुमार कुमेटी के विरुद्ध धारा 147, 148, 149, 307, 212 भादवि, 25, 27 आम्स एक्ट, 38 (2), 39 (2), 19 विधि विरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1967 के अंतर्गत माननीय न्यायालय विशेष न्यायाधीश ( एनआईए एक्ट / अनुसूचित अपराध ), कांकेर के न्यायालय में आरोप प्रस्तुत किया गया।
न्यायालयीन कार्यवाही - आरोप पत्र दाखिल होने के उपरांत माननीय न्यायालय द्वारा संज्ञान लेते हुए दिनांक 18.07.2025 को आरोपीगण के विरुद्ध आरोप तय किए गए। इसके बाद दिनांक 22.08.2025 से प्रकरण का विचारण प्रारंभ हुआ। माननीय न्यायालय द्वारा दिनांक 29.08.2026 को प्रकरण में निर्णय सुरक्षित रखा गया तथा आज दिनांक 07.09.2026 को आरोपीगण को दोषसिद्ध करते हुए निर्धारित धाराओं के तहत दंड से दंडित किया गया है।

प्रकरण की विवेचना में इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों का महत्वपूर्ण उपयोग - उक्त प्रकरण की विवेचना तत्कालीन पुलिस उप महानिरीक्षक, कांकेर रेंज कांकेर एवं वर्तमान अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर, रायपुर अमित तुकाराम कांबले ( भापुसे ) के निर्देशन तथा पुलिस अधीक्षक कांकेर निखिल राखेचा ( भापुसे ) के मार्गदर्शन एवं उप पुलिस अधीक्षक राजीव शर्मा के पर्यवेक्षण में व उप पुलिस अधीक्षक कांकेर  गिरिजाशंकर साव (रापुसे ) द्वारा की गई थी।
प्रकरण की विवेचना के दौरान सामने आए महत्वपूर्ण इलेक्ट्रानिक दस्तावेजों एवं डिजिटल साक्ष्यों को वैज्ञानिक एवं तकनीकी तरीके से सुरक्षित रखने तथा न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की दिशा में कांकेर पुलिस द्वारा विशेष सावधानी बरती गई।

प्रकरण में सीपीआई (माओवादी) प्रभाकर एवं राजे कांगे से प्राप्त इलेक्ट्रानिक दस्तावेज / डिजिटल साक्ष्यों को साइबर सेल, पुलिस मुख्यालय के तकनीकी सहयोग से आवश्यक प्रक्रिया के तहत एक्सट्रेक्ट एवं संरक्षित किया गया। इसके पश्चात उक्त इलेक्ट्रानिक साक्ष्यों को विधिवत न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जिसे माननीय न्यायालय द्वारा साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया गया। इसी प्रकार, विवेचना के दौरान पुलिस द्वारा की गई विभिन्न कार्यवाहियों एवं उनसे संबंधित महत्वपूर्ण अभिलेखों को भी ई - साक्ष्य के माध्यम से इलेक्ट्रानिक स्वरूप में संरक्षित किया गया। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 के प्रावधानों के अनुरूप विवेचना संबंधी कार्यवाहियों के इलेक्ट्रानिक रिकार्ड को सुरक्षित रखते हुए उन्हें न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया। माननीय न्यायालय द्वारा इन ई- साक्ष्यों एवं इलेक्ट्रानिक रूप से संरक्षित विवेचना संबंधी दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया जाना, कांकेर पुलिस की आधुनिक तकनीक के प्रभावी उपयोग, वैज्ञानिक विवेचना तथा साक्ष्य संकलन की बेहतर प्रक्रिया को दर्शाता है।

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